पादप ऊतक - पारिभाषिक शब्दावली - Definipedia

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पादप ऊतक - जीवविज्ञान पारिभाषिक शब्दावली | Plant Tissue - Biology Terminology

डेफिनिपीडिया के दिए गए पोस्ट में आपको पादप ऊतक से सम्बंधित पारिभाषिक शब्दावली दिया गया है। इन पारिभाषिक शब्दावली में उनके साथ उसके अर्थ भी दिए गए है।

Padap Utak Paribhashik Shabdavali

 

Padap Utak Paribhashik Shabdavali

1.ऊतक (Tissue)-एक सामान उत्पत्ति तथा विकास वाली कोशिकाओं का ऐसा समूह जो एक सामान कार्य करता हो, ऊतक कहलाते है।

2.विभज्योतकी ऊतक (Meristematic Tissue)-उतकों के अंदर कोशिकाओं के वे समूह आतें हैं, जिनमें कोशिकाएं या तो विभाजित होने वाली हों या विभाजित हों रही हों प्रविभाजी या विभज्योतकी ऊतक कहलाते हैं

3.प्राक् विभज्योतक (promerited)-प्रविभाजी कोशिकाओं का समूह,जो पौधो के किसी वृद्धि करते हुए भाग की प्रारम्भिक अवस्था को प्रदर्शित करता हों, प्राक् विभज्योतकी कहलाता है।

4.प्राथमिक विभज्योतक (Primary Meristem)-प्राक् विभज्योतकों के परिवर्धन से इन प्राथमिक विभज्योतकों का निर्माण होता है। इनकी कोशिकाएं सदैव सक्रिय रूप से विभाजन की स्थिति में रहती हैं, प्राथमिक विभज्योतकी कहलाती हैं।

5.द्वितीयक विभज्योतक (Secondary meristem)- द्वितीयक विभज्योतक ऊतक पौधे में शुरू से नहीं होते, बल्कि आवश्यकतानुसार बाद में विकसित होते हैं। द्वितीयक विभज्योतकों का विकास कुछ प्राथमिक स्थायी उतकों की कोशिकाओं में विभाजन की क्षमता से होता है, जैसे की मूल की एधा, कॉर्क की एधा।

6.शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical meristem)-ये विभज्योतक मूल; तथा ताने के शिखर पर स्थित होते हैं। इन उतकों के निरंतर विभाजन होते रहने से ही जड़ व तने लम्बाई में वृद्धि करते हैं।

7.अंतर्विष्ट विभज्योतक (Intercalary Meristem)-वास्तव में यह शीर्षस्थ विभज्योतक से पृथक हुआ भाग है, जो प्ररोह की वृद्धि के समय शीर्ष भाग से अलग हों जाता है और स्थायी ऊतक में परिवर्तन नहीं होता।

8. पाश्व विभज्योतक (Lateral Meristem)-ये विभज्योतक तनों तथा जड़ों के पाश्वों में स्थित होते हैं। ये ऊतक स्थायी उतकों के पुन: विभेदन के कारण बनते हैं।

9.स्थायी ऊतक (Permanent Tissue)-वह ऊतक जिसकी कोशिकाओं में विभाजन की क्षमता नहीं होती, स्थायी ऊतक कहलाता है।

10.सरल स्थायी ऊतक (Simple Permanent Tissue)-सरल स्थायी ऊतक प्रायः: कोशिकाओं के बने होते हैं, जिसके कारण ये समांगी होते हैं।

11.मृदुतक (Parenchyma)-सबसे अधिकता से पादप शरीर में यही ऊतक मिलता है, जो पौधों के मुलायम भागों में उपस्थित रहता है। इसकी कोशिकाएं जीवित और पतली भित्ति वाली होती हैं।

12.स्थूलकोणोतक (Collenchyma)-यह भी मृदुतक के समान जीवित ऊतक है, जिसकी कोशिकाएं मृदुतक कोशिकाओं की तुलना में लम्बी होती हैं। इनकी कोशिकाओं में अंतराकोशिकीयी स्थान नहीं पाये जाते, क्योंकि इन स्थानों अथवा कोशिकाओं के कणों पर सेल्युलोज एवं पेक्टिन जमा हों जाता है, जिसके कर्ण इनकी कोशिका भित्ति के कोने मोटे एवं स्थूल हों जाते हैं, इसी कारण इन्हें स्थूलकोणीय कहा जाता है।

13.दृढ़ोंतक (Sclerenchyma)- यह पौधों के कठोर भागों में पाया जाने वाला विशुद्ध यांत्रिकीय ऊतक है, जो बहुत लम्बी कोशिकाओं का बना होता है।

14.जटिल स्थायी ऊतक (Complex Permanent Tissue)-जटिल ऊतक कोशिकाओं का वह समूह होता है, जिनमें एक से अधिक प्रकार की कोशिकाएँ होती हैं, लेकिन सब मिलकर एक इकाई की तरह कार्य करती हैं।

15.दारू (Xylem)-इसका कार्य जल और उसमें घुले लवणों का स्थानांतर होता है।

16.फ्लोएम (Phloem)-संवहनी ऊतकों में पाया जाने वाला यह दूसरा जटिल ऊतक है, इसे बास्ट भी कहा जाता है।

17.विशिष्ट स्थाई ऊतक (Special Permanent Tissue)-इस प्रकार के ऊतक विशेष प्रकार के कार्य करते हैं - गोंद, रेजिन, तेल, श्लेष्मा, आक्षीर, या दूध आदि को स्त्रावित करने वाले ऊतक की श्रेणी में आते हैं।