अर्थशास्त्र - पारिभाषिक शब्दावली - Definipedia

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अर्थशास्त्र- पारिभाषिक शब्दावली |Economic - Terminology

डेफिनिपीडिया के दिए गए पोस्ट में आपको अर्थशास्त्र  से सम्बंधित पारिभाषिक शब्दावली दिया गया है। इन पारिभाषिक शब्दावली में उनके साथ उसके अर्थ भी दिए गए है।

Arthashastra Paribhashik Shabdavali


Arthashastra Paribhashik Shabdaval
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1.अर्थशास्त्र (Economic)-अर्थशास्त्र वह विज्ञान है जो विभिन्न प्रयोगों वाले सीमित साधनों और उद्देश्यों से सम्बन्ध रखने वाले मानवीय व्यवहार का अध्ययन करता है।

2.समष्टि अर्थशास्त्र (Macro Economic)- समष्टि अर्थशास्त्र आर्थिक विश्लेषण की शाखा है जो समस्त अर्थव्यवस्था या अर्थव्यवस्था से सम्बन्धित बड़े योगों व औसत का उनके व्यवहारों और पारस्परिक सम्बन्धों का अध्ययन करता है।

3.व्यष्टि अर्थशास्त्र (Micro Economic)- व्यष्टि अर्थशास्त्र आर्थिक विश्लेषण की वह शाखा है जो वैयक्तिक या विशिष्ट आर्थिक इकाइयों तथा अर्थव्यवस्था के छोटे भागों का उनके व्यवहारों और पारस्परिक सम्बन्धों का अध्ययन करता है।

4.आर्थिक क्रियाएँ (Economic Activities)- वे क्रियाएँ जो दुर्लभ संसाधनों के प्रयोग से सम्बन्धित है, आर्थिक क्रियाएँ कहलाती है।

5.अर्थव्यवस्था (Economy)- अर्थव्यवस्था से तात्पर्य आर्थिक संगठन के ऐसे स्वरूप से है जो सम्बन्धित क्षेत्र में रहने वाले लोगों को आजीविका के स्रोत उपलब्ध कराता है।

6.संसाधन (Resource)- ऐसी वस्तुएँँ एवं सेवाएँँ जिनका प्रयोग अन्य वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन के लिए किया जाता है, उन्हें संसाधन कहते है। जैसे- भूमि, श्रम, औजार आदि।

7.वस्तु (Goods)- मनुष्य की आवश्कताओं को संतुष्ट करने वाली मूर्त एवं स्पर्श की जा सकने वाली सामग्री को वस्तु कहा जाता है, जैसे- टेबल, खाद्य पदार्थ, कपड़े आदि।

8.सीमान्त उत्पादन संभावना (Marginal Production Potential)- सीमान्त उत्पादन संभावना से अभिप्राय उस लागत से है जो एक अतिरिक्त इकाई उत्पादित करने की अवसर लागत है। अंतिम वस्तु की लागत की संभावना सीमान्त कहलाती है।

9.अवसर लागत (Opportunity Cost)- वह लागत जो दो अवसरों में दूसरें अवसर की हानि के रूप में पहले अवसर को लाभ उठाने की लागत होती है उसे अवसर लागत कहलाती है।

10.सामान्य वस्तु (Common Goods)- वे वस्तुएँँ सामान्य वस्तुएँँ कहलाती है जिनकी माँँग उपभोक्ता की आय बढ़ने पर बढ़ती है तथा आय घटने पर कम हों जाती है।

11.पूरक वस्तुएँँ Complementary Goods)- वे वस्तुएँँ जिनका उपयोग एक साथ किया जाता है। अगर इनमें से किसी भी वस्तु की कीमत में वृद्धि हों जाती है तो इसके फलस्वरूप दूसरी वस्तु की माँँग घट जाती है। जैसे- डबलरोटी और मक्खन आदि।

12.गिफिन या घटिया वस्तुएँँ (Gifin or Substandard Goods)-घटिया वस्तु वह वस्तु होती है जिनकी माँग उपभोक्ता की आय बढ़ने से घट जाती है तथा आय में कमी आने पर इन वस्तुओं की माँग बढ़ती है। जैसे- गुड़ और मोटा वस्त्र आदि।

13.स्थानापन्न वस्तुएँँ (Substitute Goods)- यह वह वस्तु है जिनका प्रयोग एक- दूसरे के बदले में किया जाता है। जैसे- चाय और कॉफी आदि।

14.उपभोक्ता सन्तुलन (Consumer Equilibrium)- जब उपभोक्ता को आय से अधिकतम सन्तुष्टि प्राप्त हों रही हो तो उसे उपभोक्ता सन्तुलन कहते है।

15.कीमत प्रभाव (Price Effect)- वस्तुओं की कीमतों में परिवर्तन के फलस्वरूप क्रयशक्ति में परिवर्तन के कारण वस्तुओं की इष्टतम मात्रा में जो परिवर्तन होता है,उसे कीमत प्रभाव कहते है।

16.माँग की लोच (Elasticity of Demand)- माँग की लोच मूल्य एवं माँगी गयी मात्रा के बीच पारस्परिक सम्बन्ध की मात्रा को बताती है। माँग की लोच वह दर है जो मूल्य में परिवर्तन के साथ वस्तु की माँगी जाने वाली मात्रा में परिवर्तन को बताती है।

17.अधिक लोचदार माँग (More Elastic Demand)- जब किसी वस्तु की माँगी गयी मात्रा में परिवर्तन, उसके मूल्य में परिवर्तन की तुलना में अधिक अनुपात में होता है तो उस वस्तु की माँग की लोच अधिक लोचदार होती है।

18.पूर्णतया बेलोचदार (Completely Elastic)- जब किसी वस्तु के मूल्य में बहुत अधिक परिवर्तन होने पर भी उसकी माँग में कोई परिवर्तन नहीं होता है तो उसे पूर्णतया बेलोचदार कहते है।इसे शून्य माँग की लोच भी कहते है।

19.आय माँग (Income Demand)- आय माँग से तात्पर्य, वस्तुओं एवं सेवाओं के उन विभिन्न मात्राओं से है जो अन्य बातें समान होने पर उपभोक्ता एक निश्चित समय में आय के विभिन्न स्तरों पर खरीदने को तैयार रहता है, अर्थात आय बढ़ने से माँग बढ़ती है तथा आय घटने से माँग घटती है।

20.कुल उपयोगिता (Total Utility)- उपभोग की जाने वाली समस्त इकाईयों की उपयोगिताओं का कुल योग कुल उपयोगिता कहलाती है।